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कविता
Home›साहित्य›कविता›अब तो हर शख्स को

अब तो हर शख्स को

By आदित्य प्रकाश दूबे 'पथिक'
April 27, 2020
298
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अब तो हर शख्स को

अब तो हर शख्स को , चिराग  जलाना होगा ।

अपने अल्फाज में उम्मीदों को सजाना होगा ।।

रफ्तार बहुत तेज है बढ़ते हुए  अँधियारों की ,

संघर्षों की ,लौ    को, बुझने से  बचाना होगा ।।

अपनी आजादी का बचपन  नहीं देखा हमने,

इसके   यौवन  पर  लगे  दाग   छुड़ाना होगा ।।

जो   कैद  हैं , आज भी , अपनी  ही जेल में ,

वक्त गुजरने पर उन्हें,फिर से  पछताना होगा ।।

हमारा दर्द , हर पल, अब  साथ नहीं देता है ,

लगता है , इसको भी , सीने  में  दबाना होगा ।।

तुम अपने भीतर के आदमी  से रिश्ता रखो ,

जैसे ही वक्त बदला, अपना  ये जमाना होगा ।।

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