अब तो हर शख्स को

अब तो हर शख्स को , चिराग जलाना होगा ।
अपने अल्फाज में उम्मीदों को सजाना होगा ।।
रफ्तार बहुत तेज है बढ़ते हुए अँधियारों की ,
संघर्षों की ,लौ को, बुझने से बचाना होगा ।।
अपनी आजादी का बचपन नहीं देखा हमने,
इसके यौवन पर लगे दाग छुड़ाना होगा ।।
जो कैद हैं , आज भी , अपनी ही जेल में ,
वक्त गुजरने पर उन्हें,फिर से पछताना होगा ।।
हमारा दर्द , हर पल, अब साथ नहीं देता है ,
लगता है , इसको भी , सीने में दबाना होगा ।।
तुम अपने भीतर के आदमी से रिश्ता रखो ,
जैसे ही वक्त बदला, अपना ये जमाना होगा ।।
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