आओ कुछ पेड़ लगायें

छोड़ो सब बेकार की बातें,आओ अब कुछ पेड़ लगायें।
छाया होगी,फूल खिलेंगें,फल आयेंगे सब मिल खायें।।
अपनी सीमा उतनी ही है,दूजे की हो शुरू जहां से।
हम-तुम समझें पहले इसको,फिर दुनिया को समझायें।।
मस्ती और आनंद छुपा है,जीवन बड़ा सरल है भाई।
अपने-अपने कर्तव्यों को,गर निष्ठा से सदा निभायें।।
इस धरती पर यारो सबके,अपने-अपने प्यारे घर हैं।
जिसकी जो मुश्किल हैं उसको, मिलजुल कर के निपटायें।।
दस देते हो दूजे को तो,खुद भी ले आते चिंतायें।
बंद करें ये लेनदेन और प्रेम-शांति की अलख जगायें।।
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