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Home›साहित्य›लेख›आलेख›इस्पात उद्योग के सन्दर्भ में तकनीकी अनुशासन – क्यों और कैसे

इस्पात उद्योग के सन्दर्भ में तकनीकी अनुशासन – क्यों और कैसे

By श्याम नारायण श्रीवास्तव
September 14, 2022
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इस्पात उद्योग

जीवन में निरंतर प्रगति हेतु अनुशासन एक सशक्त यंत्र है | चाहें तो इसे आप मन्त्र भी कह सकते हैं | अध्यात्म की भाषा में बात की जाय तो अनुशासन अध्यात्म का ककहरा है | किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने की प्रथम सीढ़ी है अनुशासन | महान दार्शनिक आचार्य चाणक्य जब जीवन के उच्च मानवीय मूल्यों पर चर्चा करते हैं और आदर्श , मर्यादा , परिश्रम , इमानदारी आदि गुणों की सूची तैयार करते हैं तो उसमें अनुशासन को बिना जोड़े वह सूची पूर्ण नहीं होती |

दरअसल दैनिक जीवन के किसी भी क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु कुछ निश्चित आधारभूत नियम होते हैं , कुछ सूत्र होते हैं | जिनके माध्यम से ही संकल्पित लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है | यह क्षेत्र कोई भी हो सकता है | शिक्षा ,खेल , राजनीति , नौकरी , व्यवसाय ,उद्योग आदि कुछ भी | इन्हीं नियमों का कठोरता से पालन किया जाना ही अनुशासन है |

उक्त क्रम में उद्योग हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है | जहाँ हम अपने दैनिक उपभोग व आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु विभिन्न प्रकार की धातुओं का उत्पादन करते हैं और जिससे निर्माण करते है तमाम यन्त्रों का , मशीनों का | जो सहायक होते हैं उन संशाधनों को एकत्र करने में ,जिनसे संचालित होती हैं हमारी फैक्ट्रियां | इस तकनीकी क्षेत्र में अनुशासन को समझने के लिए गंभीरता से विचार करना होगा | किसी भी फैक्ट्री में कार्यरत कामगार व इंजीनियर , अधिकारी सभी कई नियम से बंधे होते हैं | जीवन में शासन एक ऐसा नियम है जो किसी और के द्वारा लोगों के लिए निश्चित किया जाता है | लेकिन अनुशासन आप स्वयं अपने ऊपर लागू करते हैं |

मशीनें किसी भी फैक्ट्री की महत्वपूर्ण अंग है | फैक्ट्री है तो मशीने हैं | ये मशीनें हमारे अर्थात मानव द्वारा निर्मित होती हैं और संचालित भी होती हैं | मशीनों के संचालन का जो अनुशासन है , वह बहुत ही कठोर है | मशीनें मित्र तो हैं लेकिन बहुत बड़ी शत्रु भी हैं | यदि आपने उन्हें अनुशासित ढंग से संचालित न किया तो वे मित्रता भूलने में थोड़ा सा भी समय नहीं गवातीं | परिणाम स्वरूप एक भयंकर दुर्घटना को अंजाम देती हैं ये मशीनें | कुछ तो चुपचाप खड़ी हो जाती है नेताओं की तरह विरोध में कि आपने हमें सही ढंग से संचालित नहीं किया लिहाजा हम उत्पादन नहीं करेंगे | मशीनों के प्रति तकनीकी अनुशासन का विशेष महत्व है | बुजुर्गों का कहना है कि जो लोग दूसरों के अनुभव से सीखते हैं वे शीघ्र ही उन्नति करते हैं | इन्हीं अनुभवों के आधार पर किसी उद्योग में उत्पादन हेतु मशीनों को संचालित करने के लिए एक स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर अर्थात SOP (Standard operating Procedure ) बनाया जाता है | जिसके अनुसार ही मशीनें संचालित की जाती हैं |

इस्पात उत्पादन के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण घटक है ताप और दाब | लौह के गर्म  धातु (Hot Metal ) के उत्पादन हेतु जिन खनिजों का प्रयोग ब्लास्ट फर्नेस में करते हैं | उन्हें गलाने के लिये विशेष ताप चाहिए और एक विशेष दाब पर गर्म हवा , जो कोक को जलाकर ताप उत्पन्न करती है | इसके कुशल नियन्त्रण की तकनीक ही एक दक्ष ऑपरेटर की योग्यता को दर्शाता है | साथ –साथ ब्लास्ट फर्नेस में जो खनिज प्रयोग किया जाता है आयरन ओर व सिंटर , कोक , लाइम स्टोन , डोलोमाइट , क्वार्टजाइट आदि का भी अपना एक अनुपात होता है | निश्चय ही यह सारी प्रक्रिया ताप व दाब का नियन्त्रण तथा निश्चित अनुपात में कच्चे माल का फर्नेस में चार्ज होना ,बहुत बड़े अनुशासन का हिस्सा है | थोड़ी सी भी लापरवाही या यों कहें कि अनुशासनहीनता विपरीत परिणाम देती है |

मशीनों के साथ अनुशासन की महत्ता – जैसे हम समाज में स्वयं अनुशासित रहने के लिए कुछ नियमों का अनुकरण करते हैं | ठीक वैसे ही हमारे दैनिक उपभोग की वस्तुओं का उत्पादन या निर्माण करती ये मशीने भी हैं | जो तकनीक के तमाम नियमों से संचालित होती हैं | जब भी एक मशीन मैन निर्धारित नियमों से परे होता है | मशीनों से उसका नियन्त्रण हट जाता है और फिर मशीनें अपने मन का कार्य करती हैं | उत्पादन घट जाता है | यहाँ तक कि दुर्घटनायें भी इन्हीं कुसंचालन का परिणाम हैं | विशेष कर इस्पात उद्योग के क्षेत्र में तो सबसे बड़ा अनुशासन पैरामीटर का है | जिसमें ताप और दाब की प्रमुख भूमिका होती है और साथ – साथ सभी खनिज का एक निश्चित अनुपात में चार्ज किया जाना भी |

मानव ने जब मशीनों का निर्माण किया तो उससे लाभ के अतिरिक्त सम्भावित खतरों पर भी आंकलन किया | और फिर उन खतरों से बचने के लिए कई उपाय भी खोजे  | तरह – तरह के उपकरण भी बनाये | यहाँ तक की अलग –अलग मशीनों या कार्य क्षेत्र के अनुसार सुरक्षा के उपकरण भी विभिन्न प्रकार के बने | जो मानव व पर्यावरण दोनों के लिए हितकारी सिद्ध हुए |

अनुशासन मानव जीवन को सुचारू रूप चलता है तो तकनीकी अनुशासन मशीनों को सुचारू रूप से संचालित करता है | हांलांकि दोनों ही प्रकार के अनुशासन का कठोरता से पालन करना मानव को ही है | वैसे सूक्ष्मता से अध्ययन करें तो मशीनें भी बेजान नहीं होतीं | दरअसल मशीने भी बोलती है | वे अपने दुःख दर्द को और ख़ुशी को हमसे साझा करती हैं | लेकिन दुर्भाग्य ये है कि प्रत्येक आपरेटर उनकी भाषा को समझ नहीं पाता | एक छोटा सा उदहारण देखें बिना ग्रीस व आयल की चलती मशीनों की आवाज और जिसमें नियमित आयलिंग ग्रीसिंग हो रही है , दोनों के चलते रहने पर उसकी आवाज को सुनें | आपको जो अंतर प्राप्त होगा वही मशीनों की स्थिति का बयान करती हैं | आवश्यक है कि फैक्ट्री परिसर में मशीनों की आवाज को समय से सुना जाय और अनुशासित ढंग से उन्हें संचालित किया जाय |

                  फैक्ट्री परिसर में सुरक्षा के क्षेत्र में अनुशासन – फैक्ट्री में कार्यरत सभी लोगों का दायित्व है कि वे मानवीय मूल्यों को समझें | अपना दृष्टिकोण , अपनी वचनबद्धता ,कर्तव्यनिष्ठता व आपने उत्तरदायित्व को गहराई से समझें | अपनी सुरक्षा के साथ – साथ दूसरों की सुरक्षा का भी महत्व दें | निर्धारित समय व ड्रेसकोड का ध्यान रखें | फैक्ट्री परिसर में मशीनों के  साथ कार्य करने वाले हम सब की सुरक्षा हेतु जो  उपकरण बनाये गये हैं उन्हें अंग्रेजी के तीन अक्षर पी पी इ (PPE ) मतलब पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेन्ट के नाम से जाना गया | उन्हें धारण करना भी अनुशासन का ही एक अंग है | जिसे समझने का बहुत सरल सा तरीका है | पहले हम यह जान लें कि आखिर हमारी सुरक्षा को  खतरा कहाँ से है ? जैसे वर्षा व धूप से बचना है तो छतरी ले के  चलते हैं । बस वैसे ही कार्य करते समय उस परिवेश से हमारे कुछ अंग सीधा प्रभावित होते हैं तो  कुछ एक अंतराल के पश्चात्  | जिसमें धूल , शोर , जहरीली गैस , तेल अदि के साथ उपकरणों का उचित – अनुचित रखरखाव भी शामिल है |

जैसे खुले हाथ से काम करते समय तेल व ग्रीस आदि का हाथ में लगना या फिर जलना , कटना एक तात्कालिक प्रभाव है तो  बहरा हो जाना , साँस फूलना दूरगामी परिणाम है | अब इसी क्रम में हेल्मेट , जूता , ईयर प्लग , नोज मास्क , सेफ्टी बेल्ट , गागेल , जैकेट , हैण्ड ग्लब्स आदि कई ऐसे साधन जो  पीपई के  नाम से जाने जाते हैं और हमारी सुरक्षा हेतु मदद करते हैं अर्थात ये सब सुरक्षा के  उपकरण हैं जिन्हें हमें अनुशासित ढंग से प्रयोग करने ही चाहिए |

वैसे कार्य करते समय किस क्षेत्र में अमुक आपरेटर को  क्या खतरा है। इन सब की विस्तृत जानकारी हेतु किसी भी फैक्ट्री में एक सर्वेक्षण होता है। जिसमें उस क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले खतरों को खोजना व उससे सुरक्षित रहने हेतु विकल्प बताना भी शामिल है। जिन्हे अंग्रेजी में HIRA (हेजार्ड आइडेंटीफिकेशन एंड रिस्क असिसमेंट) कहते हैं और इसी के  अनुसार हम सभी सुरक्षा के उपकरण धारण कर फैक्ट्री परिसर में अनुशासित रहते हैं | जैसे ऊंचाई पर कार्य करते समय सेफ्टी बेल्ट , गर्म क्षेत्र में जैकेट , शोर वाले क्षेत्र में ईयर प्लग , धूल वाले क्षेत्र में नोज मास्क या फिर केमिकल या गैस के  क्षेत्र में अलग- अलग सुरक्षा के  उपकरण हैं।

वास्तविकता ये है कि हम सब जानबूझ कर अनुशासनहीनता करते हैं और दूसरों को करने भी देते हैं। हेलमेट लगायेंगे तो फीता नहीं लगाते | बड़े शौक से धूल ( Dust ) क्षेत्र में खड़े हुए लोग मिल जायेंगे और नोज मास्क नहीं लगायेंगे | कितना भी अधिक शोर हो इयर प्लग का प्रयोग नहीं करेंगे | ताप (HEAT) में हैं लेकिन जैकेट नहीं पहनेंगे | और यदि बारीकी से तहकीकात करें तो दुर्घटना का एक मुख्य कारण है अनुशासनहीनता यानि लापरवाही |

इस अनुशासनहीनता के कारण ऐसे भी लोग अधिक दुर्घटना के शिकार होते हैं जिन्हें अपने ऊपर अति विश्वास (over confidence ) होता है | उन्हें आप कुछ तकनीकी  अनुशासन के विषय में बताना भी चाहेंगे तो वे आपकी बात ठीक से सुनेगें भी नहीं – उल्टा आपको  ही ज्ञान दे देंगे “साहब मुझे सब पता है | उम्र बीत गयी | यही सब काम करते-करते  |” सचमुच सबसे खतरनाक होते हैं ऐसे लोग | वे स्वयं तो दुर्घटना के शिकार होते ही हैं अपने साथी को भी चपेट में ले लेते हैं |

आश्चर्य है कि लोग सुरक्षा अधिकारियों के  भयवश सुरक्षा के उपकरणों का उपयोग करते हैं | सच ये है कि ऐसे लोग उन्हें नहीं खुद को धोखा देते हैं | जैसे मोटरसाइकिल सवार अधिकतर ट्रैफिक पुलिस के  भय से हेलमेट लगाता है | जब कि हेलमेट लगाने से चालक सुरक्षित रहेगा न कि वह ट्रैफिक पुलिस वाला और यही अनुशासनहीनता ही उन्हें जोखिम में डाल देती है |

तकनीकी अनुशासन का उचित मूल्यांकन – किसी भी फैक्ट्री का जो भी उत्पाद है | उसके उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक पहुँचने के मध्य कई अनुशासन हैं , उन्हें कठोरता से पालन करने वाले को राष्ट्रीय व अन्तराष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन किया जाता है और जो निर्धारित मानक को पूर्ण करते हैं उन्हें प्रमाण पत्र दिया जाता है | इस हेतु सबसे बड़ा संगठन है अन्तराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (International Organization for Standardization ) ये संगठन किसी भी उद्योग को अनुशासित रखने में सहायता करते हैं |

जैसे किसी भी फैक्ट्री का जो भी उत्पाद है | उसकी गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए उसे ISO 9001  का प्रमाण पत्र दिया जाता है | ये प्रमाण पत्र किसी भी क्षेत्र के व्यवसाय ,संस्था व उद्योग को दिया जाता है | इसकी स्थापना २३ फरवरी को जेनेवा स्विट्ज़रलैंड में हुई थी | यह एक स्वतंत्र संगठन है जो कंपनी व व्यवसायों द्वारा निर्माण किये गये उत्पाद और सेवा की गुणवत्ता और दक्षता के लिए एक मानक प्रदान करती है | इस तरह संस्था द्वारा Quality Management के लिए ISO 9001, Environmental Management के लिए ISO 14001, Information Security Management के लिए  ISO 27001, Food Safety Management के लिए ISO 22008,  Measure Management System के लिए 10012 और occupational health and safety management system के लिए ISO 18000  तो Energy Management system के लिए ISO 50001 प्रमाणपत्र दिया जाता है जो अन्तराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं |

मैं समझता हूँ व्यापार के क्षेत्र में बढती प्रतिस्पर्धा हेतु इस तरह का मूल्यांकन भी तकनीकी अनुशासन का महत्वपूर्ण अंग है | विभिन्न प्रकार के पुरष्कार व सम्मान प्राप्त करने हेतु निर्धारित कार्य भी फैक्ट्री में एक निश्चित अनुशासन पर बल देती है 1951 में मशीनों और फैक्ट्री परिसर में तमाम रखरखाव को लेकर जापान ने एक विचार , एक योजना प्रस्तुत किया जिसे उन्होंने TPM कहा अर्थात Total Productive Maintenance | मशीनों के साथ सम्पूर्ण फैक्ट्री परिसर का रखरखाव इस भांति हो कि हम अमुक मशीन से उसकी पूर्ण क्षमता से उत्पादन प्राप्त कर सकें | ये बहुत विस्तृत विषय है | इसी तरह TQM भी है जिसे Total Quality Maintenance कहते हैं | ये सब कई सीमाएं हें जिसके भीतर रह कर सुरक्षित ढंग से पूर्ण उत्पादन कर सकते हैं | जो तकनीकी अनुशासन में पूर्ण सहायक है |

दरअसल जीवन के किसी भी क्षेत्र में अनुशासन की अपनी महत्ता है | अभी हमने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की एक सौ पचासवीं जयंती मनाई है | गाँधी जी का कहना है कि नियमों का कठोरता से पालन करना ही अनुशासन है | यही नहीं वे यह भी कहते हैं कि जो नियम का पालन न करे उसे दंड भी भोगना चाहिए | आमतौर पर हर संस्था कुछ निश्चित नियमों के अनुसार संचालित होती है | कनिष्ठ कर्मचारियों के साथ वरिष्ठ अधिकारियों के लिए भी नियम पालन की अनिवार्यता से ही संस्था की सुव्यवस्था और उन्नति आधारित होती है | एक बार पुनः महान नीतिज्ञ चाणक्य की बात कहना चाहता हूँ कि —

अनवस्थितकार्यस्य न जने वने सुखम |

जने दहति संसर्गो वने संग विवार्जनम् ||

कहने का तात्पर्य है कि एक अनुशासनहीन व्यक्ति सदैव स्वयं भी दुखी रहता है और दूसरों को भी दुखी करता है | चाहे वह समाज में रहे या किसी जंगल में | बिना अनुशासन के व्यक्ति कभी भी किसी भी अवस्था में सुखी नहीं रह सकता |  वह निर्धारित नियमों को तोड़कर दूसरों के लिए कठिनाइयाँ ही उत्पन्न करता है | तो यह बहुत आवश्यक है कि आत्म अनुशासन और तकनीकी अनुशासन दोनों को ही उद्योग के क्षेत्र में विशेष महत्व दिया जाय जो स्वयं ही नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र हेतु हितकारी होगा |

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    दो मिला तो तीन को छोड़ा,तीन मिला तो दो को। छोड़ा-छोड़ी क्यों करते हो?गलत है इसको रोको।। चार मिला तो तीन को छोड़ा,पांच मिला तो चार। सबसे प्रेम से मिलना ...
  • लघु कथा

    आज की जरूरत

    “अरे!क्या हुआ?तेरे कपड़े कैसे फट गए?” घबरा कर मम्मी ने नीतू से पूछा।       नीतू ने रोते हुए कहा-“मम्मी, अभी डांस क्लास से आ रही थी कि रास्ते ...
  • लघु कथा

    वो कमरा

    “माँ जी दिख नहीं रही हैं? कहीं गई हैं क्या?” राकेश के अभिन्न मित्र प्रशांत ने राकेश से पूछा। “हां यार,वो क्या है कि घर छोटा पड़ रहा था तो ...
  • रपट

    त्रिलोचन को जाकर देखा मैंने उनके गाँव में

    त्रिलोचन जी के गाँव की ओर- पूर्व योजना के अनुसार उस दिन सुबह-सुबह सुलतानपुर से पहले मैं जासापारा गया । मुलाकात का समय रात में ही तय हो गया था ...
  • आलेख

    इस्पात उद्योग के सन्दर्भ में तकनीकी अनुशासन – क्यों और कैसे

    जीवन में निरंतर प्रगति हेतु अनुशासन एक सशक्त यंत्र है | चाहें तो इसे आप मन्त्र भी कह सकते हैं | अध्यात्म की भाषा में बात की जाय तो अनुशासन ...
  • हास्य/व्यंग

    जिंदगी में आलू और आलू सी जिंदगी

    आलू को सब्जियों का राजा माना जाता है,अब खुद ही देख लो कभी आलू-टमाटर तो कभी आलू-गोभी तो कभी आलू-परवल तो कभी और कुछ। मतलब जिंदगी में हर तरफ आलू ...
  • आलेख

    संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास

    छत्तीसगढ़ के ऐसे सन्त व सतनाम  के अलख जगाने वाले गुरु घासीदास जी का जन्म 18 दिसंबर सन1756 ई. को ग्राम गिरौदपुरी, जिला बलौदाबाजार में हुआ था। पिता महंगूदास व ...
  • लघु कथा

    मायने

    दो साथी एक रेस्टोरेंट में गये | पहले डोसा खाया , फिर दो लस्सी मंगाई | एक साथी अभी लस्सी पीना शुरू ही किया था कि उसे गिलास में एक ...
  • कहानी

    माँ के नाम की चिठ्ठी

    प्रत्येक शनिवार दोपहर में वह पत्र पेटिका का ताला खोलता है | उसमें से पत्रों को बाहर निकालता है | एक-एक करके सबको पढ़ता है | सर्व प्रथम एक रजिस्टर ...
  • लघु कथा

    कूटनीति

    दोपहर का समय था | एक दुकानदार के पास उसका साथी दूसरा दुकानदार भी बैठा था | दूसरे की दूकान उसकी दूकान से थोड़ी दूर पर थी | गर्मी का ...
  • लघु कथा

    सर्वश्रेष्ठ धर्म

    चार अलग – अलग धर्मों के लोग अपने – अपने धर्म गुरुओं से शिक्षा लेकर कई वर्षों पश्चात् पुनः एक स्थान पर आकर मिले | चारों उत्सुक थे कि बाकियों ...
  • लघु कथा

    झूठे मुखौटे

    कई वर्षों बाद दो ‘दोस्त’ आपस में मिले। दोनों ने एक दूसरे को गले लगाया और सुख – दुःख की बातें की। फिर एक ने पूछा, “तुम्हारे मुखौटे का क्या ...
  • लघु कथा

    डर

    “उसके मानसिक रोग का उपचार हो गया।” चिकित्सक ने प्रसन्नता से केस फाइल में यह लिखा और प्रारंभ से पढ़ने लगा। दंगों के बाद उसे दो रंगों से डर लगने ...
  • कविता

    आओ हाथ बढ़ाये

    ऊँच-नीच, जाति-धर्म, भेदभाव को पाटें । दिल दुनिया का जीतें, प्यार, मुहब्बत बाटें।। भाई-चारा, चैन-अमन, और हो खुशी की बातें। न राह में हो सन्नाटे, और कभी न बोयें काटें।। ...

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Sahitya Vatika- 'साहित्य वाटिका' हिंदी साहित्य में रची जा रही कहानी, कविता, लेख, गीत, गजल, लघुकथा, रिपोतार्ज, संस्मरण, समीक्षा, कॉमिक्स जैसी विधाओं की वाटिका है

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