गीतों की पालकी

गीतों की पालकी बैठकर
शब्द आज मेरे घर आए
भाव छंद लय ताल साथ ले
अलंकार नव स्वर में गाए
व्याकुल थी धड़कन भी मेरी
आकुल मन था विरह व्यथा से
रोम -रोम में पीर समाई
विकल कर्ण थे इसी कथा से
अधरों का पथ सुगम जानकर
मानस की सांकल खटकाए
गीतों की पालकी बैठकर
शब्द आज मेरे घर आए
वासंती मसि लिए लेखनी
फागुन का मकरंद घोलकर
सभी रसों को चुन चुन करके
हृदय तुला में तोल तोल कर
रूप सजाया सुघर सलोना
वाणी में संयम भर लाए
गीतों की पालकी बैठकर
शब्द आज मेरे घर आए
अतिथि देव की संस्कृति मेरी
स्वागत वंदन अभिनंदन है
कुमकुम केसर तिलक लगाकर
बारंबार चरण वंदन है
महक उठी जीवन की बगिया
उन्हें देखकर दृग भर आए
गीतों की पालकी बैठकर
शब्द आज मेरे घर आए
चाह न कोई रही अधूरी
उनको पाकर सब कुछ पाया
वैभव मिला प्रेम का उनके
मिथ्या जग मैंने ठुकराया
नेह भाव से करके दर्शन
जीवन के सब मोल चुकाए
गीतों की पालकी बैठकर
शब्द आज मेरे घर आए










