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Home›बाल साहित्य›बाल कथा›जम्बो की सूझ बूझ से

जम्बो की सूझ बूझ से

By श्याम नारायण श्रीवास्तव
April 12, 2020
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कल जब से विधायक गैण्डा सिंह के भाई की छोटी लड़की गायब हुई है , पूरे नगर में तहलका मचा है . पुलिस अधीक्षक ने कई बार अपने सभी इंस्पेक्टरों के साथ मीटिंग की . अपराधियों को जल्द से जल्द  कैसे पकड़ा जाय . इस पर विचार मंथन होने लगा .

विराट नगर में बच्चों के गायब होने की खबर पूरे क्षेत्र में फैल चुकी थी . सबके  मम्मी – पापा बहुत परेशान थे . गोलू हिरन की बहन पिंकी, गर्दभ का भतीजा सीपू , नीलू गीदड़ के छोटे मामा तीन महीने से लापता हैं . थाने में भी शिकायत का कोई असर न हुआ . पुलिस भी परेशान थी .

पुलिस अधीक्षक कैमल खान ने अपने विश्वास पात्र इन्स्पेक्टर जम्बो हाथी को बुलाकर कहा , “आज से इस केश को तुम्हे ही देखना है , जो भी सहायता चाहिए मिलेगी . लेकिन हमें वह बच्चा चोर चाहिए . देखना यह किसी अकेले का काम नहीं है . इनकी जरुर कोई गैंग होगी .”

इन्स्पेक्टर जम्बो का नाम सुनते ही अपराधी कांपने लगते थे . अपराधियों को पकड़ने के लिए बहुत से नये – नये तरीके अपनाने के कारण उन्हें सरकार से कई बार पुरस्कार मिल चुका है . लोग उन्हें जम्बो  हाथी की जगह जम्बो एलीफेंटा भी कहते हैं . आपस में चर्चा होने लगी अब इन्सपेक्टर एलीफेंटा आ गये हैं . ज्यादा दिन तक अपराधी छिप नही पायेगा .

इन्स्पेक्टर ने आते ही दो  टीम तैयार की . एक टीम पुलिस ड्रेस में तो दूसरी सादे कपड़े में . जगह- जगह छापा मारना शुरू कर दिया . लोमड़, गीदड़ , चीतल जैसे पुराने अपराधियों को पकड़ कर थाने लाया गया . पूछतांछ शुरू हो गयी . कभी जीप से तो  कभी मोटर साईकिल से रात दिन खोज होने लगी .

इसी दौरान राज्य में चुनाव की घोषणा कर दी गयी . अब पुलिस विभाग का काम और बढ़ गया . जम्बो कभी हिम्मत हारने वाले नही थे . प्रत्येक चुनावी सभा में भी उनके गुप्तचर लगे हुये थे .

इस बार गैण्डा सिंह के विरोध में नगर के प्रतिष्ठित व्यवसायी ब्लैकी भालू भी चुनाव के लिए खड़े हो गए थे . हर पार्टी के  झंण्डे और वैनर से शहर से गाँव तक रंगीन ही रंगीन दिख रहा था . चौराहे पर बड़े-बड़े नेताओं का भाषण होने लगा .

एक दिन गुप्तचर ने देखा कि चुनावी सभा के दौरान लोमड़ का साथी कुछ छोटे बच्चों को आइसक्रीम खिलाकर , उनसे ब्लैकी के समर्थन में नारे लगवा रहा था .

                          ब्लैकी भाई-जिन्दाबाद  , जिन्दाबाद -जिन्दाबाद

                           जीतेगा भई जीतेगा — ब्लैकी भाई जीतेगा             

सभा समाप्त होने के बाद सब बच्चे अपने – अपने घर चले गये . लेकिन जाते समय उस लोमड़ के साथी ने कहा था, “ तीन दिन बाद गाँधी चौक में नेता जी का भाषण होगा . तुम लोग आना . खूब आइसक्रीम खिलायेंगे .”

जैसे ही इन्सपेक्टर जम्बो को पता चला , उन्होंने ब्लैकी के बारे में पता लगाया . ब्लैकी भालू का शहर के बाहर जंगल की ओर बहुत बड़ा कृषि फार्म है . वह तेन्दू के पत्तों का ठेकेदार भी है . उसका शहर में बीड़ी का कारखाना है . वह फलों का थोक व्यापारी भी है . व्यापारियों के बीच में उसकी बहुत इज्जत है . वह पुलिस के  रिकार्ड के अनुसार कोई अपराधी भी नही है .

फिर भी इन्सपेक्टर जम्बो को जाने क्यों ब्लैकी के ऊपर शक हो गया . वह सोच रहा था हो सकता है ब्लैकी इन छोटे बच्चों से बीड़ी कारखाने में काम करवाता हो . लेकिन बिना सबूत के किसी को कैसे पकड़ा जा सकता है .

इन्सपेक्टर को अपने साथियों में सबसे अधिक सिपाही पीलू चीता पर भरोसा था . पीलू ने पता लगाया . लेकिन कारखाने में कोई भी छोटी उम्र का मजदूर नही था . जम्बो के दिमाग में एक योजना आयी , उसने पीलू को  बताया .

एक दिन शाम को उसने ब्लैकी के कृषि फार्म के झाड़ियों में कुछ सिपाहियों को छिपा दिया और सामने से इन्सपेक्टर जम्बो ने पीलू सिपाही के साथ प्रवेश किया .

वे योजना के अनुसार अपने साथ गर्दभ को भी लेकर आये थे . गर्दभ का भतीजा भी गायब था . इसलिए वह इन लोगों के साथ कृषि फार्म तक जाने को तैयार हो गया था . नहीं तो शाम के बाद गर्दभ कभी जंगल की ओर नही जाता था .

इन्सपेक्टर को  देखकर पहले तो वहां का मैनेजर जिराफ खान घबराया . फिर भी हिम्मत करके  आने का कारण पूछा , “ आइये जनाब , कैसे आना हुआ ?”

जम्बो ने कहा , “ कोई विशेष बात नही है , ऐसे ही इधर से आ रहे थे . सोचा ब्लैकी साहब से मिलते चलें .”

“वो तो आजकल चुनाव में व्यस्त हैं .”  मैनेजर ने उत्तर देते हुए इन लोगों को बैठने के लिए कुर्सियां मंगायी और साथ में कुछ खाने के लिए भी लाने को कहा .

अब मैनेजर की निगाह गर्दभ पर गई . वह पुलिस वाला नहीं लग रहा था , इसलिए पूछ बैठा , “ ये महाशय कौन है ?”

“इनका भतीजा तीन महीने से गायब है . कहते हैं हम भी पुलिस वालों के साथ उसे खोजेंगे .” पीलू के बताने पर जिराफ खान उसे गौर से देखने लगा .

तभी योजना के अनुसार पीलू ने गर्दभ को ईशारा कर दिया . गर्दभ अपने भतीजे का नाम लेकर वहीं चिल्लाने लगा , “सीपू – सीपू …… सीपू तुम कहाँ हो … सीपू तुम कहाँ हो ?”

उसके  चुप होते ही एक आवाज आई , “ सीपू यहाँ – सीपू यहाँ , मैं यहाँ हूं .”  सब एक दूसरे को देखने लगे . जम्बो ने लपक कर जिराफ खान को गिरफ्तार कर लिया . पीलू ने सीटी बजाकर और पुलिस वालों को  बुला लिया .

जिधर से आवाज आयी थी .  वह एक तहखाना था . पहुँच कर देखा तो  वहां बहुत से बच्चे थे . इन्स्पेक्टर जम्बो को ऐसा विशवास था कि अगर यह गर्दभ बोलेगा तो उसकी आवाज सुनकर इसका भतीजा भी जबाब देगा ही . गर्दभ की आवाज बहुत तेज होती है तो दूर से ही पता चल जायेगा और अगर आवाज नहीं आई तो गर्दभ को यह कह कर चुप करा देगें कि परेशान मत हो तुम्हारा भतीजा मिल जायेगा .

किन्तु एक बार फिर इन्स्पेटर जम्बो  हाथी की योजना सफल रही . उसके सूझबूझ से सारे बच्चे मिल गये . इसी के  साथ उस कृषि फार्म का मालिक ब्लैकी भालू भी पकड़ा गया . पता चला कि वह तहखाने में बच्चों से बीड़ियाँ बनवाता था और रात में दूसरे की बाग से फल चोरी कराता था . जम्बो को फिर से पुरस्कृत किया गया . लोग एलीफेंटा की जय-जयकार करने लगे . जम्बो के सूझ-बूझ से एक अपराधी फिर पकड़ा गया .

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