जीत लें हम, जंग हारी

जीत लें हम ,जंग हारी,
यह , हमारी कामना है ,
वह,सुबह होने को आई,
पर अभी कोहरा घना है।।
दिल , बहुत हैरान है कि,
क्यों भला हम यूँ झगड़ते,
छूट जाते हैं सहारे,
हम उन्हें जितना पकड़ते।
यह समय तो दर्द का है ,
दर्द भी तो अनमना है।।
जीत लें हम–
अग्रगामी , रश्मियों ने,
पीछे मुड़कर है पुकारा ,
वह ‘घुमंतू’,एक पल में ,
लिख गया इतिहास सारा।
थम गई हैं,कल्पनाएं,
सत्य की ही साधना है ।।
जीत लें हम–
कुछ परिंदों ने सजाए ,
देखो अपने घोंसले ,
डूबने हरगिज़ न देंगे ,
हम , हृदय के हौंसले ।
जीत का यह मंत्र सारा,
मन की आभा से बना है ।।
जीत ले हम —
पथ जरा पहचान लें हम,
रात्रि के अंतिम, प्रहर में ,
डूब कर उस पार जाना ,
क्या सहज ऐसी भँवर में ?
हम संजोवें , धैर्य,साहस,
पथिक मन,की याचना है ।।
जीत लेंगे हम —