दर्दों का यह अनुबंध प्रीति से
अधरों का संबंध गीत से बहुत पुराना है
दर्दों का अनुबंध प्रीति से बहुत पुराना है
नेह द्वार पर मनुहारों की सांकल बजती है
शाम सुरमई भी यादों की पागल लगती है
अक्षर बैठे मौन संकेतों का आना जाना है
दर्दो का अनुबंध प्रीति से बहुत पुराना है
चितवन थकी अश्रु भी ठहरे पलक न झपती है
रह रह कर जाने क्यों मन में टीस उभरती है
उंगली और महावर का भी साथ पुराना है
दर्दो का अनुबंध प्रीति से बहुत पुराना है
कोहबर की देहरी पर आकर स्मृति क्यों ठहरी
मधुर मिलन की आंख मिचौली प्रीति हुई गहरी
पायल की रुनझुन का स्वर जाना पहचाना है
दर्दो का अनुबंध प्रीति से बहुत पुराना है
साथ वियोगी तान लिए पाती फिर आई है
श्रवणों को विश्वास नहीं धड़कन घबराई है
सात सुरों का मेल साज से बहुत पुराना है
दर्दो का अनुबंध प्रीति से बहुत पुराना है
बोल उठी जीवन की नौका पतवार दुहाई है
मुट्ठी बंधी नेत्र फिर डोले एक हिचकी आई है
लहरों का संबंध तटों से बहुत पुराना है
दर्दों का अनुबंध प्रीति से बहुत पुराना है










