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Home›साहित्य›गज़ल›दर्द ज्यादा है

दर्द ज्यादा है

By प्रमोद सोनवानी
February 5, 2018
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दर्द ज्यादा है

प्यार का पहला अक्षर ही आधा है ,
प्यार को पानें का किसका इरादा है ।
उसे शायद नहीं मालूम त्याग है प्यार ,
कोशिश कर भूल जायेगा मेरा वादा है ।।1।।

क्यों तड़प जाता है यादों में उसके ।
समझ जायेगा तू इस खेल में नादाँ है ।।2।।

पलट-पलट कर देख चुके कई बार हमनें ।
समझना मुश्किल हर पन्नें सादा है ।।3।।

क्या कहुँ “पुष्प” रो पड़ेंगे ओ भी आज ।
कलम में स्याही कम -दर्द ज्यादा है ।।4।।

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