दीप जलाएं

जला लें दीप कोनो में,
कही सूने मकानों में।
सजा ले फूल बागों में,
कभी फीके नजारों में।।1।।
लगे चाहें तुझे सालों,
कभी सौंदर्य बिखरा लो।
जहाँ गोता लगा पाले,
सुखी आनंद बीता ले।।2।।
नही सोये दिखाई दे,
सुनें गाये दुहाई दे।
फिरे झूमें बगानों में,
बिताये यूँ तरानों में।।3।।
हिय हिलोरे हुलास भरे,
चिकट कष अरि अमत निकरे।
अभूरि अमल अमिय पी ले,
कुछ अमिष सुख अयुग जी ले।।4।।
(छन्द विधान -विजात)
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