पकौड़ा जर्नलिस्ट

पत्रकारिता में जितने भी दिहाड़ी पत्रकार हैं क्यों न उन्हें पकौड़ा जर्नलिस्ट कहा जाय,खबर बिकी मतलब पकौड़ा बिका, जी भाई बिकी लिखना अखरना नही चाहिए आपको,वास्तव में ये सारे पकौड़े मतलब खबरें बेचते हैं,जितना बिकेगा उतना पैसा,कभी कभी तो सिर्फ दिन भर मगजमारी होती है पकौड़े के लिए तेल गरम करने की भी नौबत नही आती,इसी में कुछ लोगों ने पकौड़ा प्रतिष्ठान खोल रखा है,वो थाल भर-भर पकौड़े बेचते हैं,लेकिन अब तो हालात ये हो रहे हैं कि कितनों ने सिर्फ दुकान ही खोली है पकौड़े तलने की हिम्मत न कर पा रहे और कोई कोई तो इतना तल दे रहे कि पकौड़े जल जा रहे, कोई ग्राहक न आ रहा उनके द्वारे,इन्ही में कइयों को बिना तले ही कच्चे पकौड़े बेच देने में महारत हासिल हो चुकी हैं, और कोई कोई तो बिना टीम टॉम बिना बर्तन भाड़े के ही हवा में पकौड़े बेच डाल रहे,सबका अपना अपना हुनर है भाई,और कोई कोई तो खुद ही पका के उसी में खा भी रहे उसी में खिला भी रहे और बरक्कत बराबर बरकार है।
ये पकौड़ा जर्नलिस्ट ज्यादातर छोटे शहरों में पाए जाते हैं हालाँकि बड़े शहरों में भी इनकी संख्या अच्छी खासी है लेकिन उन्हें पकौड़े के साथ-साथ चाय और जलेबियाँ भी बेचने का हुनर मालूम है।कई तो ऐसे हैं भाई जिन्हें कलछुल पकड़ने का भी सऊर नही है लेकिन भाई शान से बताते हैं कि मैं फलाँ प्रतिष्ठान का पकौड़ेबाज हूँ, और अधिकारी भी उनके झाँसे में रहते हैं, समझ ही नहीं पाते कि असल पकौड़ेबाज कौन है, कोई कोई तो सिर्फ तेल ही लेके घूम रहे,उनसे पकौड़ा बने न बने लगाने का हुनर उन्हें खूब मालूम है, उनका तेल ही काफी है पकौड़ा जाए तेल लेने, कई प्रतिष्ठान भी तो ऐसे हैं जो अपने पकौड़ेबाज से ग्राहक खोजवा कर पकौड़े तलवाते हैं न कि पकौड़े तल के ग्राहक खोजते हैं, कोई कोई तो इतने हुनरमंद हैं कि पकौड़े को भी चाशनी में डाल के बेच देते हैं, लिहाजा चटनी और सॉस की जरूरत तक नही पड़ती, ऐसे पकौड़ेबाजों को अक्सर सम्मान से नवाजा भी जाता है ग्राहकों की तरफ से कि वाह क्या पकौड़ा तलते खिलाते हैं आप, अक्सर ये सम्मान गिफ्ट या कैश का रूप भी ले लेता है, फिर ऐसे ग्राहक जब जिला छोड़ते हैं तो उन पकौड़ेबाजों के चेहरे भी कम से कम दो तीन दिन पकौड़ी की तरह हुए रहते हैं जबतक कि अगला ग्राहक सेट नही हो जाता, वैसे भी वो जमाना गया जब लोग फ्री में या यूँ कहें कि शौक में पकौड़े तला करते थे आज तो पकौड़े के बदले दाम चाहिए आखिर घर भी तो चलाना है…….एक पकौड़ा जर्निलस्ट..