फ्रेंड रिक्वेस्ट

कुछ मित्र आपस में बैठ कर बातें कर रहे थे। बात मित्रता पर हो रही थी।
पहले मित्र ने कहा,”भई, मेँ तो जब किसी से काम निकालना होता है तो बस मित्रता गांठ लेता हूँ। “
दूसरे ने कहा,”ओह!ऐसा । मेँ तो लोगों का स्टेटस देखकर ही मित्रता करता हूँ।”
तीसरे ने कहा, ” हम तो यारों पहले लोगों का जाति -धर्म देखते हैं फिर दोस्ती करते हैं।यहां तक कि फेसबुक में जो फ्रेंड रिक्वेस्ट आता है उसमें भी धर्म और जाति देखकर ही मेँ फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करता हूँ।”
यह कहकर वह मुस्कुराने लगा।
यह सुनकर दूसरे मित्र ने कहा,”,आज इक्कीसवीं सदी के इस हाईटेक युग में भी धर्म -और जाति -पांति के नाम पर दकियानूसी सोच बरकरार है । आश्चर्य है। मुझे लगता है कि तुम जैसे लोग चाँद पर पहुँच कर भी जाति -धर्म पूछोगे? मित्र, मित्रता का कोई धर्म नहीं होता । यह तुम जान लो।”
उसकी यह बात सुनकर दोनों मित्र मौन हो गए।
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