बेटी

रहमों करम मेरे खुदा
कि तूने जग में बेटी बनाई
और ऐसा मेरा सौभाग्य
कि वह मेरी गोद में आई
उसके नरम हाथों की छुअन
ज्यूँ छुईमुई शरमाई
उसके गर्म सासों से मुझे
महक मरुए की आई
जब खोली पहली पलकें
तब वह टुकर-टुकर लखाई
गोल-गोल आँखों ने पूछा
क्या तू ही है मेरी माई
सुनकर उसकी मूक भाषा
मैं हँसी मैं मुस्कुराई
फिर दोनों हाथों उठाया उसे
और झट सीने से लगाई
बेटी पाने की अनुभूति
सुखद अहसास कराए
पूर्ण पूर्णता मिली मुझे ।
घर आँगन खिल जाए
हीरे मोती की लड़ी
यह तो है मेरा चाँद सितारा
मुझको इसमें ॐ है दिखता
इससे कोई और न प्यारा ।
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