मन की तारों

मन की तारों को झंकृत कर दो आज,
बना धुन गीतों को अलंकृत कर दो आज।
रोम-रोम गाने लगे बजे सुमधुर साज,
बेसुध नजारों को मीठी सी दे दे आवाज
प्रीत के रंग में नहा उपकृत कर दो आज।
टूटे हैं आज सारे बंध
जुड़ने को हमारे तुम्हारे अनुबन्ध।
दिल खोल पट निहारें तुमको,
बिखरें चारों ओर मलय सुगन्ध।
लबों पे रस घोल तृप्त कर दो आज।
तोड़कर फासले हमारे तुम्हारे
मिले चाँदनी भी यहाँ गलियारे
चंद मीठी बातों से मन बहला ले
आसमा को उतार जमीं पर बुला ले
कुम्हलाये फूलों को भी पुष्पित कर दो आज।
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