मानदण्ड

नेता जी के चुनावी सभा का आयोजन होने वाला था।पार्टी के नेता सभा में भीड़ बढ़ाने हेतु पसीना बहा रहे थे पर देश की जनता अब थोड़ी समझदार हो गई है।वे नेताओं के लच्छेदार भाषण और झूठे वादों से अब सतर्क हो गये हैं । पार्टी के कार्य कर्ता घर -घर जाकर जनता को सभा में आने का न्योता दे चुके थे। गली -गली में लाउडस्पीकर पर प्रचार-प्रसार कर चुके थे पर लाख कोशिशों के बावजूद पार्टी के कार्य कर्ता भीड़ नहीं जुटा पा रहे थे।
उन्होंने नेता जी को फोन लगाया और सभा में भीड़ नहीं जुटने की बात बताई। नेता जी यह सुनकर आग बबूला हो गए। नेता जी ने कहा,”मुफ्तखोरों, तुम लोगों को इतना पैसा दे चुका हूँ फिर भी एक भीड़ नहीं जुटा पा रहे हो? जानते हो न, जितनी बड़ी भीड़ होती है उतना ही कार्यक्रम सफल समझा जाता है।पार्टी का रुतबा बढ़ जाता है।जाओ, भीड़ खरीद कर बढ़ाओ।”
अब पार्टी के कार्यकर्ता भीड़ की खरीद-फ़रोख्त में जुट गए।












