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लघु कथा
Home›साहित्य›लघु कथा›मायने

मायने

By श्याम नारायण श्रीवास्तव
April 15, 2022
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मायने

दो साथी एक रेस्टोरेंट में गये | पहले डोसा खाया , फिर दो लस्सी मंगाई | एक साथी अभी लस्सी पीना शुरू ही किया था कि उसे गिलास में एक बाल दिखा | उसने उस लड़के को बुलाया | जो थोड़ी देर पहले गिलास देकर गया था |

“देखो इसमें कितना बड़ा सा बाल है |”

“इधर दीजिये साहब , दूसरा लेकर आता हूँ |” नौकर ने सहमे हुए स्वर में कहा |

“तुम लोग कुछ नहीं देखते , सफाई का बिलकुल ध्यान नहीं देते |” दूसरा साथी कुछ तेज आवाज में बोला तो आवाज काउंटर पर बैठे दूकानदार तक पहुँच गई | वह वहीं से बोला , “क्या हुआ साहब ?”

ग्राहक ने सारी शिकायत दूकानदार से दर्ज करा दी |

“ठीक है सर आप उसको मत पीजिये | वहीं छोड़ दीजिये |” इसी के साथ उस नौकर से दूसरी लस्सी लाकर देने को कहा |

जाते समय नौकर वह गिलास साथ में लेकर जाना चाहा तो ग्राहक ने मना कर दिया | उसे शक था कि कहीं बाल निकालकार वही लस्सी फिर न लाकर दे दे |

नौकर खाली हाथ गया | लस्सी का दूसरा भरा गिलास रख कर पुराना गिलास वापस ले गया | उन्होंने लस्सी पी | पैसे चुकता किये और चले गये |

अब दूकानदार ने उस लडके को बुलाया | “ क्या बे तेरे को दिखाई नहीं पड़ता | लस्सी में बाल कहाँ से आ गया ? हरामखोर बैठे – बैठे तीस रूपये का नुकसान करा दिया ……….. सबकी खोपड़ी मुड़वा दूंगा समझे |” दूकानदार ने इसी के साथ अन्य नौकरों को भी हिदायत दे दी | वह नौकर सर झुकाये खड़ा था | दूकानदार ने रजिस्टर से उसका खाता खोला | उसके नाम तीस रूपये चढ़ा दिया | ठीक है जा आगे से ध्यान रखना तेरे पगार से तीस रुपया कट जायगा , तुम लोगों की लापरवाही से मैं अपना धंधा चौपट नहीं करूँगा |”

दूसरी ओर बैठा एक ग्राहक चुपचाप सारी गतिविधियों को गौर से देख रहा था | थोड़ी देर में काउंटर पर आया, “कितना बिल हुआ |”

“सत्तर रूपये |” दूकानदार के बोलने से पहले ही उस नौकर ने बताया जो उसकी मेज पर खाने का सामान दे रहा था | उस ग्राहक ने सौ रूपये की एक नोट देते हुए दूकानदार से कहा , “पूरा – पूरा रख लीजिये , सत्तर मेरे और तीस जो आपने उस नौकर के खाते में चढ़ाया है उसे काट दीजियेगा | गरीब लड़का है | उसके जीवन में तीस रूपये बहुत मायने रखता है ” और इसी के साथ बिना पैसे वापस लिए वह ग्राहक रेस्टोरेंट से बाहर निकल गया |

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