मैं तुम्हारे मौन का भी

मैं तुम्हारे मौन का भी
अर्थ पढ़ना जानता हूं
तुम कहो या मत कहो
सामर्थ गढ़ना जानता हूं
सम्मोहन का मंत्र बांचती
है अधरों की भाषा
बुनकर सपने रोज बदलती
पलकों की परिभाषा
बस खुशी के आंसुओं का
गीत गाना जानता हूं
मैं तुम्हारे मौन का भी
अर्थ पढ़ना जानता हूं
पीर पागलों सी बौराई
बनी विरहिणी राधा
हर चितवन में देख रही वह
केवल कांधा कांधा
मैं तुम्हारी बांसुरी का
हर तराना जानता हूं
मैं तुम्हारे मौन का भी
अर्थ पढ़ना जानता हूं
सुथियों का ही दीप जलाना
और मनाना मन को
यही नियति है बनी हमारी
कष्ट दिलाना तन को
मैं तुम्हारी तर्जनी का
हर बहाना जानता हूं
मैं तुम्हारे मौन का भी
अर्थ पढ़ना जानता हूं











