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Home›रपट›‘समय के साथ’ गजल की दुनिया में एक और संग्रह

‘समय के साथ’ गजल की दुनिया में एक और संग्रह

By श्याम नारायण श्रीवास्तव
April 12, 2020
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गीत गजल और साहित्य की अन्य विधाओं से परिपूर्ण शहर , स्व. पं  राम नरेश त्रिपाठी व दादा फाल्के पुरस्कार से सम्मानित गीतकार मजरुह सुल्तानपुरी के शहर सुलतानपुर में एक और गजल संग्रह का लोकार्पण रेलवे स्टेशन के सभागार में जनपद व बाहर से आये कई चर्चित साहित्यकारों की उपस्थिति में हुआ | रचनाकार नरेंद्र शुक्ल द्वारा रचित इस गजल संग्रह का नाम है ‘समय के साथ’ । कला साहित्य व संस्कृति की देवी माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन से प्रारम्भ हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार लोक भूषण से सम्मानित श्री आद्या प्रसाद सिंह ‘प्रदीप’ जी ने की । फैजाबाद से प्रकाशित पत्रिका अवध अर्चना के संपादक श्री विजय रंजन जी मुख्य अतिथि थे तो विशिष्ट अतिथि  अकबरपुर के एक डिग्री कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष श्री सत्य प्रकाश त्रिपाठी थे । यदि इस कार्यक्रम को दो सत्रों में देखा जाय तो प्रथम सत्र का संचालन साहित्यकार व वरिष्ठ रंगकर्मी जगदीश श्रीवास्तव ने की जिसमें पूजन , आमन्त्रित साहित्यकारों का परिचय , स्वागत व सम्मान आदि रहा और इसके पश्चात संग्रह के विमोचन व उस पर महत्वपूर्ण चर्चा के सत्र का संचालन अभिदेशक पत्रिका के संपादक  डॉ ओंकार नाथ द्विवेदी जी ने किया । गजल संग्रह ‘समय के साथ’ पर चर्चा के क्रम में डॉक्टर सुशील कुमार पांडे साहित्येंदु ने कहा कि जथा नामे तथा गुणे के अनुसार ‘समय के साथ’ संग्रह की गजलें समय के साथ ही हैं | उन्होंने संग्रह से हटकर गजल के इतिहास पर अपनी कई बात रखी | हिंदी साहित्य की चर्चित पत्रिका कथा समवेत के सम्पादक डॉ शोभनाथ शुक्ल ने संग्रह की गजलों पर विस्तृत चर्चा की | बीच – बीच में गजल के शेर को पढ़कर उदहारण देते हुए कहा कि निश्चय ही समाज के प्रति रचनाकार की सोच बहुत सकारात्मक व मानव मन को छूने वाली हैं और ये बात संग्रह की प्रथम गजल की प्रथम पंक्ति से ही दिखाई पडती है | जब गजलकार नरेंद्र शुक्ल कहते हैं – अगर चाहते स्वप्न साकार करना / समय एक पल भी न बेकार करना | वक्ताओं के इसी क्रम में जनपद के चर्चित गजलकार हबीब अजमली ने कहा कि किसी रचनाकार की जब कोई पुस्तक समाज के बीच आ जाती है तो उस रचनाकार की समाज के प्रति जबाबदेही और बढ़ जाती है | लोग एक नई उम्मीद से बंध जाते हैं ऐसे में समाज के प्रति आपको और गम्भीर होना पड़ेगा | मुख्य अतिथि विजय रंजन ने कहा कि इस संग्रह में बहुत सी उपयोगी रचनाएं इतनी सुंदर हैं कि उसका नाम समय के साथ न होकर जीवन के साथ होता तो और अच्छा होता | अपने विचार प्रकट करते हुए उन्होंने बताया कि गजलों में वर्णित विषयों का क्षेत्र विस्तृत है | समाज , परिवार , राजनीति , शिक्षा , युवा वर्ग , माता – पिता , बेटी – बेटियों जैसे ढेरों विषय को गजल में समेटना , समाज के प्रति रचनाकार की व्यापक दृष्टि व सोच को परिभाषित करता है | रचनाकर नरेंद्र शुक्ल ने अपनी इस संग्रह की गजलों के प्रति कहा कि गजल के पैमाने से यदि परखा जाय तो इनका भाव या फिर कला पक्ष सर्वश्रेष्ठ हों या न हों | परन्तु इतना अवश्य कह सकता हूँ कि जो विषय मैंने प्रस्तुत किये गये हैं , वह मानव मन की स्थितियों व जीवन की परिस्थितियों की एक वास्तविक झलक है | इसी के साथ उन्होंने संग्रह की कई गजलों को भी पढ़ा | जिन्हें आयोजन में बैठे लोगों ने करतल ध्वनि से सराहा | साथ – साथ कार्यक्रम में उपस्थित लोंगों के प्रति उन्होंने आभार भी व्यक्त किया | अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार आद्या प्रसाद सिंह ‘प्रदीप’ ने अन्य वक्ताओं के विचारों को समेटते हुए रचनाकार नरेंद्र शुक्ल को बधाई दी और कहा कि एक रचनाकार को समाज के प्रति सजग रहते हुए सतत लिखते रहना चाहिए | अंत में जगदीश श्रीवास्तव जी ने सब के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया | ‘समय के साथ’ गजल संग्रह के लोकार्पण के इस अवसर पर उपस्थित अन्य साहित्यकारों में दिल्ली से श्री वीरेन्द्र कुँवर , छत्तीसगढ़ रायगढ़ से श्याम नारायण श्रीवास्तव , जनपद के जयंत त्रिपाठी , अवनीश त्रिपाठी , जाहिल सुल्तानपुरी , मदन मोहन पाण्डेय ‘मनोज’ , क़ासिद सुल्तानपुरी के साथ – साथ रिटायर्ड स्टेशन अधीक्षक गण श्री सिद्धनाथ तिवारी , डी एन दूबे , जगदम्बा चौरसिया , यू एस पाण्डेय  , धर्म नारायण श्रीवास्तव , वर्तमान स्टेशन अधीक्षक एम एल मीणा , हाजी नसीम , रामदुलाल श्रीवास्तव , आर के सिंह , फागू राम आदि की उपस्थित विशेष उल्लेखनीय है |

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