सीख

उदास सा चीकू आसमान में कलरव करते हुए पक्षियों को उड़ता देख रहा था। पास बैठी मां घर के हिसाब-किताब में लगी हुईं थी। उड़ते हुए पक्षी आपस में किल्लोल करते हुए मस्त दिख रहे थे। उन्हें एक साथ उड़ता हुआ देखकर चीकू ने अपनी मां से पूछा-” मां, इन पक्षियों का कोई धर्म नहीं होता क्या? क्या ये धर्म के नाम पर कभी आपस में नहीं लड़ते?”
मां ने मुस्कुराते हुए कहा,-“नहीं बेटा, इन पशु पक्षियों का कोई धर्म नहीं होता। ये धर्म के नाम पर भला क्यों आपस में लड़ेंगे?”
“तो फिर मनुष्य क्यों धर्म के नाम पर लड़ता है? काश! मनुष्यों का भी कोई अलग-अलग धर्म नहीं होता तो आज मेरे पापा हमारे साथ बैठे होते।उन धार्मिक दंगाइयों ने मेरे पापा की जान ले ली। “यह कहता हुआ चीकू जोरों से रो पड़ा। उसे रोते हुए देखकर माँ भी सिसक उठीं।
सिसकती हुई माँ ने कहा-“काश! मनुष्य इन पशु-पक्षियों से कुछ सीख ले लेता तो संसार में आज शांति होती। कहीं कोई युद्ध नहीं होता।
माँ की यह बात सुनकर चीकू ने कहा-” हां माँ, पर क्या मनुष्य कभी यह सीख पायेगा?”
चीकू की यह बात सुनकर माँ निरुत्तर रह गईं।
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