आज की जरूरत

“अरे!क्या हुआ?तेरे कपड़े कैसे फट गए?” घबरा कर मम्मी ने नीतू से पूछा।
नीतू ने रोते हुए कहा-“मम्मी, अभी डांस क्लास से आ रही थी कि रास्ते में कुछ लड़के मेरे साथ बदतमीजी करने की कोशिश करने लगे कि तभी हमारे पड़ोस में रहने वाले शर्मा अंकल उधर से गुजर रहे थे। उन्होंने उन लड़कों को डांट-मार कर भगाया। उन लड़कों की छीना -झपटी में मेरे कपड़े फट गए।”
यह सुनकर मम्मी सकते में आ गईं।वे सिर पकड़कर वहीं जमीन पर बैठ गईं।
उनकी बातचीत सुन रही दादी ने बड़े ही गम्भीर स्वर से कहा-” बहू, काश! तुम नीतू को डांस क्लास के बदले कराटे क्लास भेजती तो यह स्थिति नहीं होती।आज इसकी सख्त जरूरत है। लड़कियां अपनी आत्मरक्षा स्वयं करें तो ऐसे बदमाश लड़कों की हिम्मत नहीं होगी कि वे किसी लड़की को छेड़ें। सुनो नीतू, तुम कल से कराटे क्लास ज्वाइन करना।”
सहमी हुई नीतू ने कहा-” जी दादी, आप सच कहती हैं । आज लड़कियों को रानी लक्ष्मी बाई और दुर्गावती जैसी वीरांगना बनने की जरूरत है ताकि ऐसे दुष्टों को मजा चखा सकें। मैं भी ऐसी बनूंगी और उन बदमाश लड़कों को जरूर मजा चखाऊंगी।” यह कहती हुई नीतू के चेहरे पर दृढ़ता के भाव आ गए।
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