फर्मान
अकबर-बीरबल का किस्सा है। एक दिन बादशाह ने कहा- ‘‘आजकल बड़ी मुखालफत की आवाजें आने
लगी हैं। क्यों हो रहा है ऐसा ?’’
‘‘जहाँपनाह आपने रियाया को बोलने की खुली छूट दे रखी है न, इसी का नतीजा है यह।’’ बीरबल ने दो
टूक जवाब दिया।
‘‘इसे रोकने की कोई तरकीब… ?’’
‘‘है क्यों नहीं।’’ बीरबल फट से बोले- ‘‘आप लोगों से बोलने का अधिकार छीन लें।’’
‘‘बीरबल, दिया गया अधिकार वापस लेना मेरे उसूल के खिलाफ है । कोई और तरकीब?’’
बीरबल सोच में पड़ गये। थोड़ी देर बाद बोले- ‘‘फिर ऐसा करें महाबली, एक इस किस्म का फर्मान
जारी करवा दें कि अगर कोई बोलने की छूट का इस्तेमाल बादशाहत या उसके अमले के खिलाफ करता पाया
जायेगा तो उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी।’’
‘‘हाँ, यह हो जायेगा।’’
वक्त बदला, अकबर-बीरबल इतिहास के पन्नों में समा कर रह गये, लेकिन उनका फर्मान आज भी
जारी है।












