मधुमास

आ रहा मधुमास लेकर प्यार की परछाइयों को
छोड़ पतझड़ की कहीं पर बेरुखी रुसवाइयों को .
रातकी मनुहार करतीं अधखिली कलियाँ सुमनकी
नेह की आभा बिखर कर बन गई खुशबू चमन की
चाह इस आवागमन की पोसती तरुणाइयों को….
अंजुरी मे भर खुशी को काल का वंदन करेंगे
भाव की रोली सजाकर अतिथि का चंदन करेंगे
कौन कब तक याद रखे विगत की रुसवाइयों को..
सीख लेकर पूर्वजों से आज का जीवन सुधारें
गलतियों को भूल मन से चेतना के तल बुहारें
मातमी सरगम भुला कर साज दें शहनाइयों को..
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