माँ

माँ, ओ मेरी माँ …….
तू ही है मेरी मरियम ,
तू ही मेरी सीता है ।
श्री कृष्ण जो उपदेश दिये ,
बस, तू वही ओ गीता है ।।
चलती थी दुर्गम राहों में ,
पाँव में चुभे कई कांटें थे ।
दर्द नहीं होती थी मुझको,
जेहन में , तेरी ओ बातें थे ।।
जेहन में मुझे छुपा लेती ।
बस,तू ही स्नेह लता है ।।
श्री कृष्ण जो……….।।1।।
तेरी ममता को पाने के लिए ,
हाय,कब नहीं मैं तड़पी हूँ ।
सारी दुनियाँ छोड़-छाड़कर ,
तेरे आँचल की ओर दौड़ी हूँ ।।
आँचल में मुझे छुपा लेती ।
बस,तू ही भाव प्रीता है ।।
श्री कृष्ण जो …………।।2।।
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