भारत का मुकुटमणि

कहते हैं विज्ञ देश का गौरव ।
चरित्रता से ही होती ।।
रत्नराशि,समृद्धि-बहुलता ।
आदर्शता से ही होती ।।1।।
सुघड़ जीवन,रीति-नीति ही ।
मुकुटमणि है भारत का ।।
चमत्कृत-सुश्रेष्ठ जीविका ।
यही धर्म है भारत का ।।2।।
ऊँचा उठना-आगे बढ़ना ।
एक लक्ष्य बनाया करते हैं ।।
चरित्रवान ही भारत को ।
सच,धन्य बनाया करते हैं ।।3।।
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