भय
वह गाँव में रहता था | बहुत खुश था | सारा परिवार एक साथ था | माता-पिता , भाई-बहन सब एक साथ | वह पला – बढ़ा और क्रमश: उच्च शिक्षा तक पढ़ा | फिर नगर में जाकर कम आय की एक नौकरी करने लगा | एक साईकिल खरीद ली | प्रतिदिन शाम को घर वापस आ जाता था | वह अब भी खुश था | परिवार का उत्तरदायित्व निभा रहा था |
उसकी शादी हो गई | इच्छाएं बढ़ी तो पांव के लिए चादर छोटी पड़ने लगी | वह एक नगर से दूसरे नगर में आ गया | आय बढ़ गई किन्तु परिवार दूर हो गया |
दिन – माह – वर्ष पंख लगा कर उड़ने लगे | दिन – प्रतिदिन उसकी चादर छोटी होने लगी | वह नगर से महानगर की ओर भागा | इस भाग दौड़ में अब तक परिवार की परिभाषा भी बदल चुकी थी | उसकी पत्नी और दो बच्चे बस | यही रह गया अब परिवार कहने को |
दूर छूट गया उसका गाँव और छूट गये उसके माता-पिता , भाई-बहन और सभी संगी साथी | महानगर की भीड़ में उसे स्पष्ट दिखता है | बड़ी मछली द्वारा छोटी मछली को निगल जाने की क्रिया | नदी के समुद्र में विलुप्त हो जाने की प्रक्रिया |
और बार-बार छोटे होते चादर को बढ़ाने की लालसा में अपने परिवार की सुख – शांति के समाप्त हो जाने का पूर्ण भय |












