अभी तलक बेटे की ज़िंदगी बनाने में लगा है

अभी तलक बेटे की ज़िंदगी बनाने में लगा है,
पिता रिटायरमेंट के बाद भी कमाने में लगा है।
जिस दिन से मेरा नाम छपा है अखबार में,
हर शख़्स मुझको अपना बताने में लगा है।
इतना समय तो चाँद पर जाने में नहीं लगता,
जितना समय मुझे तेरे करीब आने में लगा है।
वो एक ग़ज़ल है और उसका नाम तरन्नुम,
इसलिए पूरा शहर उसे गुनगुनाने में लगा है।
इतना खर्चा तो घर को बनाने में नहीं लगता,
जितना खर्चा मुझे घर को सजाने में लगा है।
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