आजादी का मतलब
आजादी का पर्व जैसे ही निकट आया | स्कूलों में इस पर्व को उत्सव के रूप में मनाने की तैयारी शुरू हो गई | सभी कक्षाओं में सूचना पहुंच गई | आजादी के पर्व के दिन सभी बच्चे सफ़ेद ड्रेस में आयेंगे | दरअसल माधव के स्कूल में दो तरह का ड्रेस है | बुधवार व शनिवार को सफ़ेद पैंट और शर्ट | बाकी अन्य दिनों में स्लेटी रंग का पैंट और शर्ट है | इसी के साथ और भी सूचनाये दे दी गईं | जैसे कितने बजे स्कूल आना है | झंडारोहण के लिए मुख्य अतिथि कौन होंगे और कार्यक्रम के बाद सभी बच्चों को मिठाई मिलेगी |
जिन बच्चो को डांस व गीत प्रस्तुत करने हैं | उनके ड्रेस तो पहले ही बता दिए गये हैं | जो बच्चे मुख्य अतिथि के पास खड़े होकर राष्ट्रगान गायेंगे , उन्हें भी बता दिया गया | आदित्य , जलज , यश , अंश , दिव्यांश , पावनी आदि के साथ माधव को भी राष्ट्रगान के लिये चुना गया था |
पन्द्रह अगस्त को देश भक्ति के फ़िल्मी गीतों की आवाज स्कूल ही नहीं बल्कि बाजार के दुकानों व सड़क के चौराहों पर भी गूंज रही थी | बच्चे हाथों में तिरंगा झंडा लिए स्कूल की ओर भागे चले जा रहे थे | रंगीन पन्नियों से पूरे बाजार को लोगों ने सजाया था | हर तरफ ख़ुशी का वातावरण | सभी बच्चे समय से स्कूल पहुँच गये |
स्कूल के मैदान में सारे बच्चे टीचर के साथ लाइन में खड़े हो गये | तभी खेल के टीचर ने माइक पर घोषणा की | अब हमारे बीच प्रिंसिपल सर के साथ मुख्य अतिथि के रूप में जनपद के जिला शिक्षा अधिकारी पधार रहे हैं | आप सभी लोग जोरदार तालियों से स्वागत करें | बच्चों ने तालियाँ बजाई |
इसी के साथ झंडा रोहण हुआ | राष्ट्रगान गाया गया | भारत माता की जय के साथ मुख्य अतिथि ने अपना भाषण शुरू किया |
“ इस स्कूल के प्रिंसपल साहब , सभी टीचर्स व प्रिय बच्चों , सबसे पहले आज आजादी के इस पावन पर्व पर आप सभी को हार्दिक बधाई |”
और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा , “ बच्चों ये आजादी क्या है , जानते हैं आपलोग ? आजादी का मतलब होता है , हमारा जो भी अधिकार है हमें हमारी इच्छा के अनुसार मिलना चाहिए | भोजन , चिकित्सा , शिक्षा आदि तमाम जीवन से जुड़ी आवश्यकताएं पूरी होनी चाहिए | हम सब कोई भी कार्य करने के लिए स्वतंत्र हों | हाँ लेकिन एक अनुशासन के भीतर और वह अनुशासन स्थापित करता है हमारा संविधान , हमारा कानून | हमारी आजादी की सीमा वहां तक है जहाँ तक दूसरे की आजादी भंग न हो | बच्चों आप मेरी बात समझ रहे हो न , मै क्या कहना चाहता हूँ ?
“यस सर” पूरे ग्राउंड से जोरदार आवाज आई |
“ओके , वैरी गुड | देखो जैसे कुछ लोग तोते को पिजड़े में बंद कर घर में रखते हैं , बन्दर , भालू आदि को पकड़ कर रखते हैं | सोचो पक्षी आकाश में उड़ते हैं तो कितने अच्छे लगते हैं | लेकिन जब उसे किसी पिजड़े में कैद कर दिया जाय तो उन्हें कितना दुःख होता होगा | वह बाग़ – बगीचे में उड़कर अपने मन चाहे फल नहीं खा सकते |
मतलब वे आजाद नहीं है | वे अपने परिवार व परिचितों से जब चाहें मिल नहीं सकते | वे गुलाम है दूसरों के | दूसरे लोग उसके मालिक हैं | वे अपनी मर्जी से उसे खाना पानी देते हैं और उसे वही खाना पड़ेगा | चाहे उसे पसंद हो या न हो | उसकी मज़बूरी है | भूख लगेगी तो उसे वही खाना है जो उसके मालिक ने दिया है |
ऐसे ही आजादी के पहले हमारे देश में अंग्रेजों का राज था | हम उनके गुलाम थे , वे हमारे मालिक थे | हम उनके लिए काम करते थे | लेकिन हम कोई काम अपनी मर्जी से नही कर सकते थे | क्यों कि हम सब आजाद नहीं थे | बहुत संघर्षों के बाद महात्मा गाँधी , पंडित जवाहर लाल नेहरु , सरदार बल्लभ भाई पटेल , सुभाष चन्द्र बोस जैसे बहुत से नेताओं ने जनता के साथ मिलकर अंग्रेजों को यहाँ से भगाया |
आजाद किया भारत देश को और हम सब को | आज हम सब आजाद हैं लेकिन हमें आजादी की कीमत जाननी चाहिए | अपना संविधान हमें जानना चाहिए | इसकी हमें रक्षा करनी चाहिए | इस आजादी के दिवस पर आप सभी को एक बार फिर से बधाई हो | इसी के साथ उन्होंने कहा , “बोलिए भारत माता की जय |” सभी ने एक साथ जयकारा लगाया | “भारत माता की जय |”
फिर कुछ बच्चो ने अपना गीत प्रस्तुत किया और अंत में मिठाई का पैकेट सभी बच्चो को दिया गया | मिठाई माधव ने भी ली | लेकिन उसका मन नहीं लग रहा था | वह जल्दी से घर पहुंचना चाहता था | उसे अपने आंगन में अमरुद के पेड़ के पास पिजड़े में बंद तोते की याद आ रही थी | वह तेजी से घर की ओर भागा | रास्ते में सोचता जा रहा था | उसका तोता मिट्ठू भी तो हमारे परिवार के सदस्यों का गुलाम है | वह भी तो उन्मुक्त होकर अन्य चिड़ियों की तरह उड़ना चाहता होगा | वह तो मेरे ही आँगन में लगे अमरुद के पेड़ से अपनी मर्जी से फल नहीं खा सकता |
उस पेड़ पर बाहर के तोते जब भी आते हैं और बोलते है तो यह पिंजड़े का तोता भी बोलता है | माधव अब तक बड़ा खुश होता था | देखो मेरा तोता बात कर रहा है | लेकिन आज उसे लगा | उसका तोता भी उनसे अपनी आजादी के लिए कहता होगा |
अब तक माधव घर पहुँच चुका था | उसने अपने पैकेट से लड्डू का एक टुकड़ा तोते की कटोरी में रखते हुए कहा , “लो मिट्ठू ये आजादी का लड्डू है , खा लो |”
तोते ने नहीं खाया | अचानक माधव की आँख में आंसू आ गये |
“अरे हाँ , तुम्हारे लिए ये आजादी की मिठाई तो है ही नहीं | तुम तो हमारे गुलाम हो | आजादी की मिठाई तो अपनों के साथ खाई जाती है |”
इसी के साथ माधव ने बिना मम्मी – पापा से पूछे ही पिजड़े का दरवाजा खोल दिया और कहा , “ जाओ मिट्ठू तुम भी अपने परिवार के साथ आजादी के मीठे फल खाओ |”
तोता बाहर निकला , पहले अमरुद की डाल पर बैठा और फिर उड़कर पास ही आम के पेड़ की ओर जाने लगा | जहाँ और भी तोते बैठ कर आजादी के गीत गा रहे थे | माधव अपने मिट्ठू को उन्मुक्त गगन में उड़ते देख बहुत खुश हुआ | उसकी आँखों में ख़ुशी के आंसू थे |
उसने धीरे से इतना ही कहा , “ जाओ मिट्ठू तुम भी हमारी तरह हर पन्द्रह अगस्त को आजादी का पर्व अपने साथियों के साथ मनाना | आज से तुम आजाद हो मिट्ठू ………. तुम आजाद हो |” और ऐसा कहते हुए माधव फफककर रो पड़ा | उसे भी आज आजादी का मतलब पता हो गया था |








