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    बाल साहित्य के साथ कुछ ऐसी चिन्तायें जुड़ी हैं, जिनका वास्तविकता से भले ही कोई लेना-देना न हो, किन्तु बच्चों के ज्ञान और मनोरंजन के परिक्षेत्र ...
  • टीवी के आगे बच्चा
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    आज टी.वी. का सबसे बड़ा दर्शक वर्ग बच्चे हैं। यह खूब मस्त होकर टीवी के आगे सुध-बुध खोये रहते हैं। अभिभावक आश्वस्त हैं कि बच्चा टीवी ...
  • जादुई अंगूठी
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    मजमें के खंडित वृत के अन्दर उस नौजवान ने एक बार फिर डुगडुगी बजाई। तत्पश्चात् बोला, ‘‘हिन्दू भाइयों को राम-राम, मुसलमान भाइयों को सलाम। भाइयों मेरे ...
  • आँधी
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    ठाकुर रघुराज सिंह को रमेसरा का रंग-ढंग जरा भी न सुहाता था। ऐसा भी क्या हलवाहा, कि बस काम से काम। बात-व्यवहार की दमड़ी भर अकल ...
  • त्रिशंकु
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    त्रिशंकु रमेश को नौकरी मिल गयी। अब सिर्फ माँ की एक इच्छा रह गई थी, जल्द से जल्द बहू लाने की। रमेश स्वयं इस मामले में ...
  • बच्चा
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    अब मुझे बड़ी शिद्दत से महसूस होने लगा था कि हमारे एक बच्चा होना चाहिये। यानी एक अर्से से पत्नी के अन्दर जो तड़प थी, वह ...
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    अकबर-बीरबल का किस्सा है। एक दिन बादशाह ने कहा- ‘‘आजकल बड़ी मुखालफत की आवाजें आने लगी हैं। क्यों हो रहा है ऐसा ?’’ ‘‘जहाँपनाह आपने रियाया ...