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देखो तो शाला जाकर
करके जल्दी से तैयारी, शाला पढ़नें जायेंगे । चित्र बनें हैं जहाँ मनोहर, मन अपना बहलायेंगे ।। पुस्तक-काँपी लेकर झटपट, सीधे शाला जाना है । ध्यान ...पकौड़ा जर्नलिस्ट
पत्रकारिता में जितने भी दिहाड़ी पत्रकार हैं क्यों न उन्हें पकौड़ा जर्नलिस्ट कहा जाय,खबर बिकी मतलब पकौड़ा बिका, जी भाई बिकी लिखना अखरना नही चाहिए आपको,वास्तव ...उसके हिस्से की धूप
मई माह की चिलचिलाती धूप में झुलसते और गर्म हवाओं के तमाचे खाते हुए वह तेज़-तेज़ कदम रखते हुए घर की ओर बढ़ रहा था…दो ठ़डे-मीठे ...पारिवारिक संवेदनाओं को उजागर करती हैं नि:शब्द की कहानियां
नि:शब्द कहानी संग्रह डा अनीता श्रीवास्तव की दूसरी कहानी संग्रह है | पन्द्रह कहानियों के इस गुलदस्ते की कहानियां पारिवारिक संवेदनाओ, आपस के तर्क-वितर्क , स्त्री ...जीवन की अंतरवीणा
मन की अंतरवीणा कोलाहल को भेद उमंग तरंग के छंदों से कुछ कहती कुछ गाती प्रतिबिंबित करती मधुर रागों को तेरा सूनापन भी मैं हर लूँगी ...















