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कविता

Home›साहित्य›Category: "कविता" (Page 2)

कविता– कविता कल्पना और विचारों (भावों) का तालमेल है | महान साहित्यकार आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने ‘कविता क्या है ?’ शीर्षक से एक महत्वपूर्ण लेख लिखा है | जिसमें उन्होंने बताया है, “भाव सौन्दर्य और नाद सौन्दर्य दोनों के संयोग से कविता की सृष्टि होती है | कविता मनुष्य के ह्रदय को उन्नत करती है और ऐसे-ऐसे उत्कृष्ट और अलौकिक पदार्थों का परिचय कराती है जिसके द्वारा यह लोक, देवलोक और मनुष्य देवता हो सकता है, वे लिखते हैं कि कविता सृष्टि-सौन्दर्य का अनुभव कराती है | जो मनुष्य को सुन्दर वस्तुओं में अनुरक्त करती है | कविता की बोली और साधारण बोली में अंतर है |

  • कविता

    पिंडदान और गाँव का घर

    By श्याम नारायण श्रीवास्तव
    April 16, 2020
    गाँव का घर अब नहीं रहा हो गया है खंडहर किन्तु जाने क्यों इधर आये दिन सपने में आता है गाँव का घर एकदम ...
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  • कविता

    गाँव बड़ा है प्यारा

    By आनंद सिंघनपुरी
    April 16, 2020
    गाँव बड़ा है प्यारा,  बीता बचपन हमारा। खेले है उस आँगन, तालों का घाट पावन। पुरवाई गीत सुनाए, भौरें  है गुनगुनाये। पंछी है चहचहाये, ...
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  • रे मानव
    कविता

    रे मानव

    By आनंद सिंघनपुरी
    April 16, 2020
    रे मानव चल,आहिस्ता चल,धीरे से चल मंजिले हो चाहे कोसों  दूर, जरा संभल मुश्किलों में सम्भलना इतना आसान नहीं सरल पथ पर चलना कोई ...
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  • कविता

    बासन्ती पवन

    By आनंद सिंघनपुरी
    April 16, 2020
    हौले, हौले रे घुमड़ बासन्ती पवन, लेकर अहसासों का मीठा छुअन। मस्ती भरी अंगड़ाई, कलियां भी देख देख मुस्काई। झूम उठे भौरें ऊंचे गगन।। ...
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  • बरसों
    कविता

    बरसों बदरा

    By आनंद सिंघनपुरी
    April 16, 2020
    आओ बदरा घिर आओ, नैन तके हो आकुल। घटा बनके उतर आओं चित्त हैं   व्याकुल।। सांझ,सँवरें नित तुम्हरें राह तके विकल मनवा। अब की ...
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  • कविता

    कल्पनाओं के

    By आनंद सिंघनपुरी
    April 16, 2020
    कल्पनाओं के अनगिनत डगर पर, साक्षी बन फिरते रहेंगे बन हमसफ़र। भूत और प्रारब्ध में मिलते रहेंगे यूँही करते अदाकारी बन सपनों का सौदागर ...
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  • कबीरा
    कविता

    दूजा न कबीरा

    By आनंद सिंघनपुरी
    April 12, 2020
    पुण्य सरोवर में, हर उपवन में, आकाशी इस आँगन में । लिए पसार प्रीत, अनुबंध गीत, क्षणिक  क्षुब्ध सी वेदना में। पुलक भये शरीर,ना ...
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  • कविता

    हाइकु विन्यास में गज़ल

    By आनंद सिंघनपुरी
    April 11, 2020
    कभी बेकार/ की  बातों  को/ छोड़ देवें भी, टूटते रिश्तों/को आपस में कभी/जोड़ देवें भी| बड़ी जालिम/ दुनिया की रिवाजें/जिसमें बंधे, ऐसे वैसे को/ ...
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  • कविता

    अंतर्व्यथा

    By आनंद सिंघनपुरी
    April 11, 2020
    व्यथित  मन  के घेराव से,   न कहीं पर ठाँव, थमते  क्यों  नहीं    हमारे,   दोनों  हाथ  पाँव। आशा  रूपी  बाणों   से,    ले    ...
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  • दीप जलाएं
    कविता

    दीप जलाएं

    By आनंद सिंघनपुरी
    April 11, 2020
    जला   लें  दीप  कोनो में, कही   सूने   मकानों   में। सजा  ले   फूल   बागों में, कभी   फीके   नजारों में।।1।। लगे   चाहें  तुझे    सालों, कभी  ...
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  • पढ़नें जाना है

    अब तो पढ़नें जाना है

    By प्रमोद सोनवानी
    December 10, 2022
  • एक और द्रोणाचार्य

    एक और द्रोणाचार्य

    By डॉ.शैल चन्द्रा
    December 9, 2022
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    माँ का हृदय

    By डॉ.शैल चन्द्रा
    December 8, 2022
  • पढ़नें जाना है

    अब तो पढ़नें जाना है

    By प्रमोद सोनवानी
    December 10, 2022
  • चाँद पर पानी

    चाँद पर पानी

    By श्याम नारायण श्रीवास्तव
    February 25, 2018
  • एक समय पश्चात्

    By श्याम नारायण श्रीवास्तव
    February 26, 2018

    Timeline

    • December 10, 2022

      अब तो पढ़नें जाना है

    • December 9, 2022

      एक और द्रोणाचार्य

    • December 8, 2022

      माँ का हृदय

    • December 7, 2022

      सार्थकता

    • December 6, 2022

      भैया देखो रोबोट

    Sahitya Vatika- 'साहित्य वाटिका' हिंदी साहित्य में रची जा रही कहानी, कविता, लेख, गीत, गजल, लघुकथा, रिपोतार्ज, संस्मरण, समीक्षा, कॉमिक्स जैसी विधाओं की वाटिका है

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      By डॉ.शैल चन्द्रा
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      सार्थकता

      By डॉ.शैल चन्द्रा
      December 7, 2022
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      By प्रमोद सोनवानी
      December 10, 2022
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      चाँद पर पानी

      By श्याम नारायण श्रीवास्तव
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      By श्याम नारायण श्रीवास्तव
      February 26, 2018
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      By गणेश कछवाहा
      February 25, 2018

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