कविता
कैसी व्यथा
सुन प्रभो हर लो दुख त्रासरे। फिर कभी न दिखे यह घाव रे।। यह सभी जन की बहती दशा। कर सके हल ना यह ...एक समय पश्चात्
नव निर्मित भवन को भीतर – बाहर खूब सजाया उसने पहले तो भरा तमाम अत्याधुनिक संसाधनों से फ्रिज , ए .सी , वाशिंग मशीन ...छत्तीसगढ़ ल बंदव
छत्तीसगढ़ ल बंदव अउ बंदव इहा किसाने ल भईया धनहा कटोरा भरे न हा ग सियनहा धनहा कटोरा भरे न ए ग किसनहा…धनहा कटोरा………….. ...हमें सिखा देंगे
सूखी नदी शुष्क हवा पीले पत्ते मुरझाईं कोंपलें खिल उठीं और गाते झरने बहती नदी महकते फ़ूल हृदय में उतरकर तरंगों उमंगों से चुराते ...श्रम करें हम
श्रम करें कुछ श्रम करें हम , तन में नव उल्लास भरें । श्रम तेज से मन पुलकित हो , ऐसा कुछ प्रयास करें ...भारत का मुकुटमणि
कहते हैं विज्ञ देश का गौरव । चरित्रता से ही होती ।। रत्नराशि,समृद्धि-बहुलता । आदर्शता से ही होती ।।1।। सुघड़ जीवन,रीति-नीति ही । मुकुटमणि ...













