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आओ कुछ पेड़ लगायें
छोड़ो सब बेकार की बातें,आओ अब कुछ पेड़ लगायें। छाया होगी,फूल खिलेंगें,फल आयेंगे सब मिल खायें।। अपनी सीमा उतनी ही है,दूजे की हो शुरू जहां से। ...पढ़ते रहो पाठ प्रेम का
दो मिला तो तीन को छोड़ा,तीन मिला तो दो को। छोड़ा-छोड़ी क्यों करते हो?गलत है इसको रोको।। चार मिला तो तीन को छोड़ा,पांच मिला तो चार। ...आज की जरूरत
“अरे!क्या हुआ?तेरे कपड़े कैसे फट गए?” घबरा कर मम्मी ने नीतू से पूछा। नीतू ने रोते हुए कहा-“मम्मी, अभी डांस क्लास से आ ...त्रिलोचन को जाकर देखा मैंने उनके गाँव में
त्रिलोचन जी के गाँव की ओर- पूर्व योजना के अनुसार उस दिन सुबह-सुबह सुलतानपुर से पहले मैं जासापारा गया । मुलाकात का समय रात में ही ...इस्पात उद्योग के सन्दर्भ में तकनीकी अनुशासन – क्यों और कैसे
जीवन में निरंतर प्रगति हेतु अनुशासन एक सशक्त यंत्र है | चाहें तो इसे आप मन्त्र भी कह सकते हैं | अध्यात्म की भाषा में बात ...जिंदगी में आलू और आलू सी जिंदगी
आलू को सब्जियों का राजा माना जाता है,अब खुद ही देख लो कभी आलू-टमाटर तो कभी आलू-गोभी तो कभी आलू-परवल तो कभी और कुछ। मतलब जिंदगी ...संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास
छत्तीसगढ़ के ऐसे सन्त व सतनाम के अलख जगाने वाले गुरु घासीदास जी का जन्म 18 दिसंबर सन1756 ई. को ग्राम गिरौदपुरी, जिला बलौदाबाजार में हुआ ...माँ के नाम की चिठ्ठी
प्रत्येक शनिवार दोपहर में वह पत्र पेटिका का ताला खोलता है | उसमें से पत्रों को बाहर निकालता है | एक-एक करके सबको पढ़ता है | ...















