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अभी तलक बेटे की ज़िंदगी बनाने में लगा है
अभी तलक बेटे की ज़िंदगी बनाने में लगा है, पिता रिटायरमेंट के बाद भी कमाने में लगा है। जिस दिन से मेरा नाम छपा है अखबार ...उस शख़्स को बाग़ से देखकर
उस शख़्स को बाग़ से देखकर जाते हुए, रोने लगते हैं वहाँ के फूल मुरझाते हुए। उसे छू कर देखने का तज़ुर्बा नहीं है मगर, मेरे ...क्या लिखूं,कैसे लिखूं ?
हो गया हूं फिर अपरिचित , क्या लिखूं,कैसे लिखूं , रत्नगर्भा ,रक्तरंजित ! क्या लिखूं ,कैसे लिखूं ? सी रही है हवा फिर से , उस ...जीत लें हम, जंग हारी
जीत लें हम ,जंग हारी, यह , हमारी कामना है , वह,सुबह होने को आई, पर अभी कोहरा घना है।। दिल , बहुत हैरान है कि, ...मन की बात कोई ना समझे
मन की बात कोई ना समझे , मन फिर चला अकेला । तरुणाई फिर से है मुखरित, कैसा अद्भुत मेला ।। झंकृत है यौवन के स्वर ...अब तो हर शख्स को
अब तो हर शख्स को , चिराग जलाना होगा । अपने अल्फाज में उम्मीदों को सजाना होगा ।। रफ्तार बहुत तेज है बढ़ते हुए अँधियारों की ...हार गया मन,जीते-जीते
हार गया मन,जीते-जीते, फटी जिंदगी ,सीते-सीते, अपने ,अंधियारे बीते हैं , मन की मदिरा पीते-पीते। धूप – छांव के ऊपर -नीचे, कैसा यह कोहराम मचा है? ...मन की तारों
मन की तारों को झंकृत कर दो आज, बना धुन गीतों को अलंकृत कर दो आज। रोम-रोम गाने लगे बजे सुमधुर साज, बेसुध नजारों को मीठी ...बिल्ली मौसी
बिल्ली मौसी आती रोज नहीं किसी से डरती रोज गुड़िया बोली बिल्ली मौसी तुमतो दिखती शेरनी जैसी म्याऊँ – म्याऊँ कर आती हो दूध मलाई खा ...दिन थका हारा गया रात मचल के आयी
दिन थका हारा गया रात मचल के आयी नींद तब जा के इन आँखों में सँभल के आयी उसकी आवाज़ में वो बात नहीं थी हरगिज़ ...















