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आसमाँ पानी हवा आग और ज़मीं है
आसमाँ पानी हवा आग और ज़मीं है एक मुश्त-ए-ख़ाक में क्या-क्या नहीं है एक बुत पर कुल-जमा इतना यक़ीं है “वह ख़ुदा है ठीक है अपने ...मुख़ालिफ़त के अँधेरे से लौट आ वापस
मुख़ालिफ़त के अँधेरे से लौट आ वापस निज़ाम के बुने घेरे से लौट आ वापस जदीद राहों पे चलने का वक़्त आ गया अब पुरानी सोच ...वे मिट गए और मिट गया शमशीर का लिक्खा
वे मिट गए और मिट गया शमशीर का लिक्खा लेकिन अभी तक चल रहा है ‘मीर’ का लिक्खा ऊपर से ख़ुदा उतरा न उतरी थी ख़ुदाई ...ज़ख़्म हैं उस पे ज़ख़्म के ये मंज़र
ज़ख़्म हैं उस पे ज़ख़्म के ये मंज़र अब के तोहमत लगाएँ हम किस पर हँसना मजबूरी थी दीवारों की रोते रहते तो डूब जाता घर ...हटना है या कि बाज़ी लगानी है जान की
हटना है या कि बाज़ी लगानी है जान की है सामने तुम्हारे घड़ी इम्तिहान की क़ीमत नहीं घटी सर-ए- बाज़ार धान की हाक़िम ने क़ीमतें गिरा ...मेरा सुख तुमको मिल जाए
मेरा सुख तुमको मिल जाए और तुम्हारी पीड़ा मुझको कंकरीला पथ मुझे मुबारक फूलों भरी डगर हो तुझको हर उदास मौसम मेरा हो तुम्हें बसंती पवन ...दर्दों का यह अनुबंध प्रीति से
अधरों का संबंध गीत से बहुत पुराना है दर्दों का अनुबंध प्रीति से बहुत पुराना है नेह द्वार पर मनुहारों की सांकल बजती है शाम सुरमई ...एक दर्द की बात न पूछो
अगणित दर्द छुपाए बैठा एक दर्द की बात न पूछो दिन तो गिन गिन कट जाएंगे किंतु रात की बात न पूछो शब्द नहीं है ...मैं तुम्हारे मौन का भी
मैं तुम्हारे मौन का भी अर्थ पढ़ना जानता हूं तुम कहो या मत कहो सामर्थ गढ़ना जानता हूं सम्मोहन का मंत्र बांचती है अधरों ...गीतों की पालकी
गीतों की पालकी बैठकर शब्द आज मेरे घर आए भाव छंद लय ताल साथ ले अलंकार नव स्वर में गाए व्याकुल थी धड़कन ...











